मुजफ्फरपुर : नदी, तालाब और पोखर में पानी घटने के साथ ही लोकल मछलियों की आवक इन दिनों बाजारों में अधिक हो रही है।
आवक में तेजी और मांग कम रहने से इसकी कीमत में तीस से चालीस रुपए प्रतिकिलों की गिरावट आई है। लोकल मछलियों की आवक रहने से आंध्र प्रदेश वाली मछलियों की मांग कम हो गई है।
शहर के प्रमुख बाजारों में मछली खरीदने के लिए भले ही पहुंच रहे है, लेकिन पितृपक्ष रहने से लोग मछली खाना कम ही खरीद रहे है।
यहीं कारण है कि बाजारों में मछलियों की मांग काफी कम है। आगामी 3 अक्टूबर तक पितृपक्ष का समय है। आगामी 4 अक्टूबर को दिन सोमवार रहने से मछली की डिमांड अधिक रह सकती है।
जबकि 5 अक्टूबर से नवरात्र शुरू होने के बाद दस दिनों तक इसकी मांग नहीं रहेगी। नवरात्रा के समय कारोबार पूरी तरह से मंदा रहेगा।
शहर के अखाड़ाघाट, लक्ष्मी चौक, कल्याणी, भगवानपुर, गोबरसही, कटहीपुल, पुरानी बाजार, जीरोमाइल, सदपुरा आदि जगहों पर मछली की बिक्री है।
बाजार में लोकल नदी, तालाब और पोखर वाली छोटी-छोटी डेरवा, पोठिया, चेलवा, कवई आदि मिक्स वाली मछलियां 60 से 100 रुपए प्रतिकिलो जबकि 50 से 200 ग्राम वाले रोहू, कतला और नैनी 130 रुपए प्रतिकिलो की दर से बिक्री हुई।
वहीं एक किलो और डेढ़ किलो साइज वाले रोहू और कतला 200 से 225 रुपए प्रतिकिलो की दर से बेचा गया। जबकि दो से तीन किलो साइज वाले रोहू और कतला 250 से 300 रुपए प्रतिकिलो की दर से बिका। आंध्र प्रदेश वाले रोहू और कतला 120 से 160 रुपए प्रतिकिलो जबकि जासर 100 से 120 रुपए प्रतिकिलो की दर से बेचा गया। मछली बेचने वाली सुनैना कुमारी ने बताया कि बरसात थमने से नदी, पोखर और तालाब में पानी घट गया है। इसलिए अभी लोकल मछलियों की आवक की भरमार है। इस कारण कीमत में भी गिरावट आई है। लोकल मछलियां आने से आंध्र प्रदेश की मछलियों की मांग घट गई है।
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