बिहार : प्रदेश मे शरा'बबंदी को सही और ग'लत ठह'राने की तमाम कोशिशों के बीच बिहार का एक ऐसा गांव जो संभवत राज्य ही नहीं बल्कि देश के लिए अनूठा है।

Corona Infection Is More Dangerous To People Who Consume Wine. - सावधान  रहें: शराब पीने वालों को कोरोना से खतरा ज्यादा, बढ़ानी पड़ रही दवा की डोज -  Amar Ujala Hindi News Live

जी हां, जमुई जिले का यह गांव तब भी शराब से अछूता रहा, जब हर गली मोहल्ले में शराब की दुकानें हुआ करती थी। हम गिद्धौर प्रखंड अंतर्गत गंगरा गांव की बात कर रहे हैं।

यहां के लोग अपने पूर्वज बाबा कोकिलचंद को देव तुल्य की मान्यता देते हैं। उनके ही संदेशों को आत्मसात कर शराब से खुद को दूर रखते हैं। बात सिर्फ गांव की नहीं बल्कि बाहर रहने वाली नई पीढ़ी के युवक भी शराब पार्टी में शिरकत नहीं करते।

शिक्षक चुनचुन कुमार कहते हैं कि उन लोगों के पूर्वज बाबा कोकिल चंद का तीन संदेश हम ग्रामीणों के लिए जीवन सूत्र है। शराब से दूरी, नारी का सम्मान और अन्न की रक्षा का उन्होंने संदेश दिया था।

इसका हम सभी ग्रामीण पालन कर रहे हैं। बाबा कोकिलचंद ने जंगल में बाघिन के हमले में अपना नश्वर शरीर त्याग किया था। तब उन्होंने नारी सम्मान करते हुए बाघिन के हमले का कोई जवाब नहीं दिया था। उसके बाद से ही उनकी पूजा-अर्चना प्रारंभ हुई। उनकी मिट्टी की पिंडी आज भी यथावत है।

मान्यताओं के अनुसार उस पिंडी के स्वरूप से कभी कोई छेड़छाड़ की कोशिश नहीं की गई। हालांकि, मंदिर को भी पक्का रूप देने के पहले उनकी विधिवत आज्ञा ली गई थी। चेन्नई में कार्यरत इंजीनियर साकेत सिंह ने कहा कि वे लोग बाहर में भी बाबा के त्रिसूत्र का अक्षरश; पालन करते हैं।

उन्होंने आधुनिक युग में शराब पीने की शौक को शान समझने की सोच को नकारते हुए कहा कि शराब पार्टी में शिरकत करने की दोस्तों की गुजारिश को विनम्रता पूर्वक अस्वीकार करने के बाद उन्हें काफी सम्मान के दृष्टि से देखा जाता है। यह आत्म संतुष्टि का विषय है।