बिलासपुर 2 मार्च (आईएएनएस)| छत्तीसगढ़ में हुए झीरम घाटी हत्याकांड के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) केा बड़ा झटका लगा है, क्योंकि उच्च न्यायालय की युगल खंठपीठ ने एनआईए की अपील केा खारिज कर दिया है। एनआईए ने झीरम घाटी हत्याकांड को लेकर दूसरी प्राथमिकी दर्ज की थी और उसे ही जांच सौंपे जाने का आग्रह किया था। मिली जानकारी के अनुसार, झीरम घाटी हत्याकांड के पहली प्राथमिकी राज्य पुलिस ने दर्ज की थी। एनआईए ने इस मामले केा लेकर दूसरी प्राथमिकी दर्ज की थी और इसी प्राथमिकी के आधार पर जांच करना चाहती थी। यह मामला जब जगदलपुर की विशेष अदालत में पहुॅचा तो उसे खारिज कर दिया गया, इस फैसले के खिलाफ एनआईए ने उच्च न्यायालय में अपील की।
बताया गया है कि इस मामले की सुनवाई करने के बाद न्यायाधीश आर सी एस सामंत और न्यायाधीश अरविंद सिंह चंदेल की युगलपीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए एनआईए की अपील को खारिज कर दिया। इसका आशय साफ है कि इस झीरम घाटी हत्याकांड के राजनीतिक षडयंत्रों की जांच राज्य सरकार कर सकती है।
ज्ञात हेा कि, भाजपा के काल में वर्ष 2013 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल के नेतृत्व में प्रदेश भर में परिवर्तन रैली का आयोजन किया गया था। 25 मई 2013 को परिवर्तन रैली सुकमा में होने के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला जगदलपुर की तरफ जा रहा था, तभ्ीा झीरम घाटी के पास नक्सलियों ने पेड़ गिराकर काफिले को रोक दिया और हमला बोल दिया। इस हमले में नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, महेंद्र कर्मा, विद्याचरण शुक्ला, उदय मुदलियार सहित 29 नेताओं और कार्यकतार्ओं की हत्या कर दी।
राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद झीरम घाटी हत्याकांड में मारे गए उदय मुदलियार के बेटे जितेंद्र मुदलियार ने दरभा थाने में वर्ष 2020 में हत्या और षडयंत्र का आरोप लगाते हुए प्रकरण दर्ज कराया था। पुलिस में दर्ज इस आपराधिक प्रकरण को एनआईए ने जगदलपुर की विशेष अदालत में चुनौती दी थी। एनआईए ने इस मामले की जांच सौंपने की मांग भी की थी, लेकिन विशेष अदालत ने आवेदन को खारिज कर दिया था।
विशेष आदलत के फैसले केा एनआईए ने चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका दायर की थी। इसके बाद से जांच पर रोक लगी हुई थी। अब युगल पीठ ने इस अपील केा खारिज कर दिया है ।
इस मामले में एनआईए की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के एडिशनल सालिसिटर जनरल विक्रम जीत बनर्जी और हाईकोर्ट के असिस्टेंट सालिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा ने बहस की। वहीं, राज्य शासन की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता ओटवानी और जितेंद्र मुदलियार की तरफ से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव बहस की।
झीरम घाटी हत्या कांड के प्रभावित परिवार के जितेंद्र मुदलियार का कहना है कि अब न्याय की उम्मीद जगी है। उम्मीद है कि षड़यंत्र का खुलासा होगा। अभी तक एनआईए की आपत्ति के कारण इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं हो पा रही थी।
No comments:
Post a Comment