आए दिन विवादों में रहने वाली प्रदेश की एक मात्र मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी अब पहल को लेकर चर्चा में है। दरअसल मूल्यांकनकर्ताओं पर नकेल कसने के लिए मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विवि प्रशासन इस नई व्यवस्था शुरू करने जा रहा है। इसमें मेडिकल कॉलेज में बनाए गए सेंटर में ही अब मूल्यांकनकर्ता कापियों को जांचेंगे। कापियों की चेकिंग डिजीटल तौर पर ही होगी, लेकिन पहले की तरह मूल्यांकनकर्ता अब घर बैठे यह काम नहीं कर सकेंगे।
प्रदेशभर में बनाए जाएंगे 16 सेंटर
विवि प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक इस व्यवस्था को नए सत्र से शुरू किया जाएगा। इसके लिए प्रदेशभर के 16 शासकीय मेडिकल कॉलेजों को शामिल किया गया है। इन कॉलेजों में सेंट्रल असिसमेंट प्रोग्राम यानि केप सेंटर होगा, जहां पर कैमरें की निगरानी में मूल्यांकनकर्ता बैठकर कापियों को चेक करेगा।
क्यों की जा रही व्यवस्था
विवि प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि लगातार शिकायतें आ रही थी कि मूल्यांकन कार्य अच्छे से नहीं किया गया है। साथ यह भी जानकारी मिली कि कुछ मूल्यांकनकर्ता इसमें लापरवाही बरत रहे हैं। इसमें विवि प्रशासन की यह पहल छात्र हित में कारगर होगी।
इनका कहना है -
विवि प्रशासन कुलपति व कार्य परिषद के सदस्यों के मार्गदर्शन में छात्र हित में निर्णय ले रहा हैं। परीक्षा परिणाम में और पारदर्शिता लाने के लिए इस प्रस्ताव को तैयार किया गया है। इस पर कार्य परिषद ने अपनी सहमति देते हुए पास कर दिया है। अगले सत्र से यह नई व्यवस्था लागू हो जाएगी।
-डॉ. पुष्पराज सिंह बघेल, रजिस्ट्रार एमयू जबलपुर
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